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सहारनपुर। योग आज केवल आस्था का विषय नहीं रह गया है बल्कि बुद्धिलब्धि, सृजनात्मकता, एकाग्रता सहित शरीर और व्यक्तित्व के विकास के साथ विविध रोगों के निदान में योग के प्रयोग अब शोध का विषय बन रहे हैं, भारत ही नहीं जापान जैसे तकनीकी रूप से अग्रणी देशों के चिकित्सा वैज्ञानिकों की नजर भी अब योग के करिश्मों पर है, दवाओं के बोझ और भारी आर्थिक बजट को धता बताते हुए शांति व आनंद पाने के साथ ही बीमारियों से नजात पाकर आरोग्य हासिल कर लेने में योग की भूमिका पर जानकारी पाने की जिज्ञासा लिए जापान के मेडिकल प्रोफेसर्स और जुटेंदो यूनिवर्सिटी के मेडिकल छात्रों का दल मोक्षायतन योग संस्थान द्वारा प्रतिपादित भारत योग द्वारा योगीराज और नटराज भगवान शिव की परंपरा में भारतीय योग और शास्त्रीय नृत्य की बारीकियों को चिकित्सा विज्ञान की कसौटी पर कसने के भाव से संस्थान की निदेशक गुरु मां आचार्या प्रतिष्ठा से मिले। संस्थान के नोएडा स्थित भारत योग केंद्र पर आयोजित कार्यशाला में जापान के चिकित्सा विशेषज्ञों के प्रमुख प्रो. तेकेशिता यू और प्रो कियोहाइड तोमोका ने भारतीय ऋषियों की परंपरा के भारतयोग की अवधारणा और फिटनेस के लिए प्रचलित आधुनिक योगा के अंतर को समझा।
गुरु मां आचार्या प्रतिष्ठाने बारह वर्ष पूर्व गुरुदेव पद्मश्री भारत भूषण के संग जापान के प्रमुख नगरों टोकियो, रोपोंगी, जुशी, कमाकुरा, करविजवा आदि की मोनेस्ट्रीज में एक दशक पूर्व किए गए मंत्र ध्वनियों के स्वास्थ्य एवं आरोग्य वर्धक प्रयोगों और पूर्व में जापान की डा मिनेको कुनो और मोक्षायतन योग संस्थान के बीच हुए करार से जापानी चिकित्सा विशेषज्ञों को अवगत कराया और कोरोना काल में भारत योग के योग प्रोटोकॉल से चिकित्सा जगत को मिले सहयोग के बारे में जानकारी देते हुए विविध पैथियों को हाथ मिला कर चलने की आवश्यकता पर बल दिया। जापानी चिकित्सा विशेषज्ञों ने भारतीय परंपरा की यज्ञ पैथी को समझने के लिए गुरु मां आचार्या प्रतिष्ठा और मोक्षायतन संस्थान की नोएडा शाखा के वरिष्ठ साधक नवनीश शर्मा, विक्रांत और प्रणय शर्मा ने विविध योगिक क्रियाएं वैज्ञानिक व्याख्या के साथ करके दिखाई और अंतर्राष्ट्रीय योग गीत पर रोमांचकारी योग प्रस्तुति भी दी।

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