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नई दिल्ली — दिल्ली सरकार के राजकीय सर्वोदय कन्या विद्यालय नंबर 2, जामा मस्जिद, दिल्ली में प्रधानाचार्या पूनम मीना जी की पहल एवं संरक्षण में एक विशेष ‘योग-टेक’ कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में विद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों को शरीर के महत्वपूर्ण, संवेदनशील तथा नाजुक हिस्सों के लिए विकसित सूक्ष्म-प्रभावी, सरलीकृत एवं अत्याधुनिक योग-तकनीक का व्यावहारिक अनुभव कराया गया।

कार्यशाला का उद्देश्य

इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य योग, चिकित्सा पद्धतियों और स्वास्थ्यवर्धक जीवनशैली तकनीकों को एकीकृत रूप में प्रस्तुत करना था। कार्यशाला में बताया गया कि यह ‘मल्टी-स्पेशलिटी ग्लोबल क्वालिटी स्टैंडर्ड’ योग-टेक प्रणाली व्यक्ति की आवश्यकता के अनुसार कस्टमाइज़्ड और सरल बनाई गई है, ताकि इसे हर आयु वर्ग का व्यक्ति आसानी से अपना सके।

आयोजकों के अनुसार, यह प्रणाली शरीर के पाचन तंत्र, मस्तिष्क, श्वसन तंत्र और अन्य संवेदनशील अंगों पर सूक्ष्म लेकिन गहरा प्रभाव डालने के लिए डिज़ाइन की गई है। इसे पैरामेडिकल नेचुरल फिजिकल मेडिसिन तथा साइको-फिजियोथेरेपी के सिद्धांतों के साथ जोड़कर विकसित करने का दावा किया गया।

डॉ. बी.आई.के. की प्रणाली

कार्यशाला में बताया गया कि यह प्रणाली ख़ानदानी हकीम एवं भारत सरकार के पूर्व ट्रेनिंग कमिश्नर डॉ. बी.आई.के. द्वारा लगभग 50 वर्षों के क्लिनिकल अनुभव, पेशेवर अनुसंधान और प्रयोगों के आधार पर विकसित की गई है। प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, इसके विकास में भारत सरकार एवं अन्य संस्थाओं द्वारा 101 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है।

डॉ. बीआईके ब्रांडेड योग-टेक को पाचन तंत्र को सक्रिय और युवा बनाए रखने, बेहतर स्वास्थ्य तथा सक्रिय जीवनशैली बनाए रखने के लिए भी बताया गया। कार्यशाला में कहा गया कि नियमित अभ्यास से 70 वर्ष की आयु के बाद भी व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार सक्रिय और स्वस्थ जीवन जी सकता है।

पेट के लिए विशेष अभ्यास

कार्यशाला का एक प्रमुख हिस्सा पेट और पाचन तंत्र से जुड़ा रहा। योग एक्सपर्ट कौसर जी ने तीन सरल एवं सूक्ष्म-प्रभावी व्यायामों के माध्यम से पेट की सफाई और पाचन तंत्र को सक्रिय करने की विधि समझाई।

उन्होंने बताया कि जिस प्रकार कपड़ों से धूल को झाड़-झटक कर या पटख-पटख कर हटाया जाता है, उसी प्रकार विशेष योग अभ्यासों से पेट में जमा कचरे और अपचित पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिल सकती है। प्रतिभागियों ने इन अभ्यासों को सरल और व्यावहारिक बताया।

दिमाग की शक्ति बढ़ाने वाली तकनीक

मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी कार्यशाला में विशेष अभ्यास सिखाए गए। इन अभ्यासों को मानसिक शक्ति, इच्छाशक्ति और याददाश्त बढ़ाने वाला बताया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि ये तकनीकें दिमाग को तरोताजा रखने और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक हो सकती हैं।

विद्यार्थियों और शिक्षकों ने इन अभ्यासों को रोचक एवं उपयोगी बताया। कई प्रतिभागियों ने कहा कि ऐसी सरल तकनीकें परीक्षा की तैयारी, एकाग्रता और दैनिक जीवन में मानसिक तनाव कम करने के लिए लाभदायक हो सकती हैं।

फेफड़ों के लिए ‘डबल कैपेसिटी’ अभ्यास

कार्यशाला का सबसे चर्चित हिस्सा फेफड़ों से जुड़ा अभ्यास रहा। डॉ. बी. इस्लाम की ब्रांडेड योग-टेक के अंतर्गत दाएं और बाएं फेफड़ों को अलग-अलग रूप से सक्रिय करने वाला विशेष श्वास अभ्यास प्रदर्शित किया गया।

प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, इस अभ्यास में एक फेफड़े के फैलने और दूसरे फेफड़े के सिकुड़ने की प्रक्रिया को महसूस कराया गया। कार्यशाला में 90 प्रतिशत से अधिक प्रतिभागियों ने बताया कि उन्होंने अपनी श्वास और संवेदना में स्पष्ट बदलाव अनुभव किया। कई प्रतिभागियों ने इसे अपने जीवन का पहला ऐसा अनुभव बताया, जिसमें दोनों फेफड़ों की गति को अलग-अलग महसूस किया गया।

स्वस्थ समाज का संदेश

कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और दूसरों को भी प्रेरित करने का संदेश दिया गया। संदेश में कहा गया — “खुद फिट रहिए और दूसरों को भी फिट रहने में मदद कीजिए, ताकि हम सभी मिलकर एक स्वस्थ समाज बनाने में अपना योगदान दे सकें और देश का नाम रोशन कर सकें।”

प्रधानाचार्या पूनम मीना जी की पहल और योग विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से आयोजित यह कार्यशाला विद्यालय में स्वास्थ्य शिक्षा, योग एवं आधुनिक जीवनशैली तकनीकों को जोड़ने का एक प्रयास रही। विद्यार्थियों और शिक्षकों ने इसे ज्ञानवर्धक, व्यावहारिक एवं प्रेरणादायक बताया। यह विद्यालय केंद्रीय दिल्ली के जामा मस्जिद पैवालान कॉम्प्लेक्स में स्थित है और इसका CBSE से संबद्धन भी दर्ज है।

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