जनता के मुद्दे उठाने वालों को दबाने की कोशिश? झूठी तहरीर पर उठे सवाल…

 

* जनता की आवाज़ उठाना पड़ा भारी या फिर झूठी तहरीर से रचा गया राजनीतिक खेल?

कांधला। कस्बे के मोहल्ला मौलानान में कथित झूठी तहरीर को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। भाजपा युवा मोर्चा (शामली) के ज़िला मंत्री शीनू अनवर तथा मोहल्ला निवासी शाहज़ेब उर्फ़ भूरा ने आरोप लगाया है कि उन्हें सामाजिक और राजनीतिक रूप से बदनाम करने के लिए एक सुनियोजित साजिश के तहत झूठी तहरीर दिलवाई गई है। इस मामले ने पूरे क्षेत्र में नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।

 

आरोप है कि दोनों युवक लंबे समय से मोहल्ले की टूटी सड़कें, बदहाल नालियां, गंदगी, खराब स्ट्रीट लाइट, जलभराव और अन्य जनसमस्याओं को लगातार सोशल मीडिया तथा संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि जनहित की आवाज़ बुलंद करना कुछ लोगों को रास नहीं आया, जिसके चलते उन्हें झूठे आरोपों के जरिए विवादों में घसीटने की कोशिश की गई।

 

भाजपा युवा मोर्चा के ज़िला मंत्री शीनू अनवर ने कहा कि “यह लड़ाई केवल हमारी नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की है जो जनता के अधिकारों की आवाज़ उठाते हैं। यदि जनसमस्याओं को उजागर करने वालों को झूठी शिकायतों के जरिए बदनाम किया जाएगा तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।”

 

उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक और व्यक्तिगत द्वेष के चलते उनकी छवि खराब करने की कोशिश की गई है। उनका कहना है कि यदि किसी के पास कोई वास्तविक शिकायत है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन किसी की प्रतिष्ठा धूमिल करने के उद्देश्य से झूठी तहरीर देना कानून का दुरुपयोग है।

 

शीनू अनवर ने बताया कि जल्द ही भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ जिलाधिकारी से मुलाकात कर पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की जाएगी। साथ ही मांग की जाएगी कि यदि शिकायत झूठी पाई जाती है तो झूठी तहरीर देने और दिलवाने वाले लोगों के विरुद्ध भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

 

मामले ने अब राजनीतिक रंग लेना शुरू कर दिया है। क्षेत्र में चर्चा है कि क्या भाजपा सरकार में ही भाजपा युवा मोर्चा के ज़िला मंत्री को निशाना बनाया जा रहा है? क्या जनसमस्याओं को उठाने की कीमत झूठे आरोपों से चुकानी पड़ेगी, या फिर जांच में कोई अलग ही सच्चाई सामने आएगी? इन सवालों ने पूरे घटनाक्रम को और भी चर्चित बना दिया है।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति सड़क, नाली, सफाई और अन्य जनसमस्याओं की आवाज़ उठाता है तो उसे संरक्षण मिलना चाहिए, न कि उसे विवादों में फंसाया जाना चाहिए। हालांकि यह भी उतना ही आवश्यक है कि हर शिकायत की निष्पक्ष जांच हो और तथ्य सामने आने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाए।

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