मशीन थी, लेकिन इलाज नहीं’.दो साल बाद आखिरकार मिलेगी डायलिसिस की सौगात

 

सादिक सिद्दीक़ी

 

कांधला।कहने को सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लाखों दावे करती है, लेकिन कांधला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की हकीकत उन दावों की पोल खोलती नजर आई। करीब दो वर्ष पहले मरीजों की सुविधा के लिए लाई गई डायलिसिस मशीन तकनीशियन की कमी के कारण धूल फांकती रही और इस दौरान किडनी मरीज इलाज के लिए दूसरे शहरों की खाक छानने को मजबूर रहे। अब जाकर स्वास्थ्य विभाग की नींद खुली है और मशीन को शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।करीब दो वर्ष पहले पूर्व विधायक राजेंद्र बंसल ने सामाजिक सेवा के तहत यह अत्याधुनिक डायलिसिस मशीन सीएचसी कांधला को उपलब्ध कराई थी। उद्देश्य साफ था कि कांधला, एलम, झिंझाना, कैराना और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब मरीजों को डायलिसिस के लिए शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ या दिल्ली के अस्पतालों की दौड़ न लगानी पड़े। लेकिन मशीन आने के बाद स्वास्थ्य विभाग तकनीशियन की व्यवस्था तक नहीं कर सका और लाखों रुपये की मशीन अस्पताल में शोपीस बनकर रह गई।

इस लापरवाही का सबसे बड़ा खामियाजा उन मरीजों ने भुगता, जिनकी जिंदगी डायलिसिस पर टिकी हुई है। कई मरीजों को सप्ताह में दो से तीन बार दूसरे शहरों का सफर करना पड़ा। गरीब परिवारों की जेब पर आर्थिक बोझ बढ़ता गया, जबकि समय पर इलाज न मिलने से मरीजों और उनके परिजनों को मानसिक पीड़ा भी झेलनी पड़ी।

पूर्व विधायक राजेंद्र बंसल ने कई बार इस मामले को उठाया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को अवगत कराया कि मशीन बिना तकनीशियन के बेकार पड़ी है। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने निजी खर्च पर एक वर्ष तक तकनीशियन रखने का प्रस्ताव भी दिया, ताकि मरीजों को राहत मिल सके। लेकिन विभाग की ओर से लंबे समय तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।

अब चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीरेंद्र सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि डायलिसिस मशीन के संचालन के लिए तकनीशियन उपलब्ध करा दिया गया है। मशीन को इंस्टॉल कर दिया गया है और उसके साथ आवश्यक आर.ओ. सिस्टम भी स्थापित कर दिया गया है। अंतिम औपचारिकताएं पूरी होते ही मशीन को जनता के लिए शुरू कर दिया जाएगा।

डायलिसिस सेवा शुरू होने के बाद कांधला क्षेत्र के हजारों मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। अब उन्हें हर बार दूसरे शहरों के अस्पतालों में घंटों का सफर तय नहीं करना पड़ेगा। इलाज स्थानीय स्तर पर मिलने से समय और धन दोनों की बचत होगी और मरीजों को समय पर बेहतर उपचार मिल सकेगा।

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