
“इलाज से पहले इंतजार की सजा!”डॉक्टरों की कमी से सीएचसी में मचा हाहाकार
* तीन डॉक्टरों पर तीन लाख की आबादी का बोझ, मरीज लाइन में बेहाल कब जागेगा सिस्टम?
सादिक सिद्दीक़ी
कांधला। नगर का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों बदहाल व्यवस्था का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। यहां इलाज के लिए आने वाले मरीजों को बीमारी से ज्यादा सिस्टम की लापरवाही का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टरों की भारी कमी के चलते अस्पताल “इलाज केंद्र” कम और “इंतजार केंद्र” ज्यादा नजर आ रहा है।
क्षेत्र में करीब तीन लाख से अधिक की आबादी है, लेकिन इतने बड़े इलाके के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सा प्रभारी समेत महज तीन डॉक्टर ही तैनात हैं। ऐसे में बढ़ते मरीजों का दबाव इन गिने-चुने चिकित्सकों पर इस कदर हावी हो चुका है कि हालात बेकाबू होते जा रहे हैं।
मौसम में लगातार बदलाव के चलते वायरल, बुखार, खांसी-जुकाम और अन्य बीमारियों ने पैर पसार लिए हैं। नगर ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी बड़ी संख्या में मरीज रोजाना अस्पताल पहुंच रहे हैं। नतीजा—अस्पताल परिसर में सुबह से ही लंबी कतारें लग जाती हैं और भीड़ दिनभर कम होने का नाम नहीं लेती।
सोमवार को हालात ने और भी विकराल रूप ले लिया। पर्ची बनवाने के लिए घंटों इंतजार, फिर डॉक्टर को दिखाने के लिए अलग लाइन—मरीजों की परेशानी का कोई अंत नहीं। बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे तक लाइन में खड़े-खड़े थक गए। कई मरीजों ने तो घंटों इंतजार के बाद बिना इलाज के ही वापस लौटना बेहतर समझा।
दूसरी ओर, मौजूद डॉक्टर भी लगातार मरीजों को देखने में जुटे हैं, लेकिन सीमित संसाधनों के चलते वे भी असहाय नजर आ रहे हैं। मरीजों की बढ़ती भीड़ और कम स्टाफ के बीच स्वास्थ्य सेवाएं चरमराती हुई दिखाई दे रही हैं।
इस बिगड़ती स्थिति को देखते हुए चिकित्सा प्रभारी डॉ. वीरेंद्र सिंह ने शासन और प्रशासन को पत्र भेजकर अतिरिक्त चिकित्सकों की तैनाती की मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा स्टाफ के साथ इतनी बड़ी आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देना बेहद मुश्किल हो गया है।
डॉ. सिंह ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि जल्द ही डॉक्टरों की संख्या नहीं बढ़ाई गई, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि शासन स्तर से जल्द सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे, जिससे मरीजों को राहत मिल सके।