“गटर में डूबी वार्ड की सत्ता, जनता बेहाल!” वार्ड 23 में बदबू का ‘राज’, सभासद लापता समाजसेवी ने संभाला मोर्चा
कांधला। मोहल्ला मौलानान का वार्ड 23 इन दिनों गंदगी और लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बना हुआ है। छतरी वाले कुएं के पास उफनता गटर कई दिनों से सड़कों पर गंदा पानी उड़ेल रहा था, और जिम्मेदार लोग मानो ‘कुर्सी ध्यान’ में लीन थे।
गटर का कहर, गलियों में नरक जैसे हालात
सड़कों पर बहता गंदा पानी, चारों तरफ बदबू का साम्राज्य—हालात ऐसे कि लोगों का घर से निकलना तक मुश्किल हो गया। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान नजर आए।
शिकायतों की ‘फाइल’ धूल खाती रही
मोहल्लेवासियों ने बार-बार सभासद के दरवाजे खटखटाए, लेकिन हर बार मिला सिर्फ “देखेंगे…कराएंगे…” का रटा-रटाया जवाब। हाल ये कि लोगों ने तंज कस दिया— “नौ दिन चले अढ़ाई कोस, काम वही ढाक के तीन पात!”
एंट्री हुई ‘एक्शन मैन’ शकेब अख्तर की
जैसे ही समाजसेवी शकेब अख्तर को इस गटर कांड की भनक लगी, उन्होंने बिना देर किए मोर्चा संभाल लिया। कर्मचारियों को मौके पर बुलवाया और खुद मौके पर डटकर सफाई अभियान शुरू करा दिया।
कुछ ही देर में खत्म ‘गटर संकट’, जनता को राहत
जो समस्या सुबह से नासूर बनी हुई थी, उसे कुछ ही मिंटो में साफ कर दिया गया। बदबू गायब, रास्ते साफ—लोगों ने राहत की सांस ली और कहा “अब आया असली काम!”
सभासद ‘आउट’, शकेब ‘हिट’!
जहां सभासद की निष्क्रियता पर जनता का गुस्सा फूट रहा है, वहीं शकेब अख्तर के तेज एक्शन की जमकर तारीफ हो रही है। हर गली में एक ही चर्चा— “जो दिखा, वही बिकेगा!”
सियासी पारा हाई, जनता का मूड ‘ऑन’
इस पूरे मामले ने वार्ड 23 की राजनीति में हलचल मचा दी है। अब सवाल सीधा है—अगर हर बार समाजसेवी ही मैदान में उतरेंगे, तो चुने हुए प्रतिनिधि आखिर किस काम के?
जनता अब चुप नहीं… अगला जवाब वोट से देने के मूड में दिख रही है!
