
रमज़ान की रौनक, इबादत और खुशियों से जगमगाया माहौल
सादिक सिद्दीक़ी
कांधला। मुकद्दस रमज़ान का महीना जारी है और कांधला की फिज़ाओं में ईमान, बरकत और मोहब्बत की खुशबू घुल चुकी है। हर रोज़ेदार सब्र, नेकी और इबादत में मशगूल है। जैसे ही सूरज ढलता है, कांधला की गलियां रौशनी और चहल-पहल से भर उठती हैं।शाम के वक़्त जामा मस्जिद, केराना मार्ग मोहल्ला मौलानान मोहल्ला खेल मोहल्ला मिर्दगान इलाके में इत्र और पकवानों की खुशबू माहौल को महका देती है। बाजारों में खजूर, सेवइयां, रूह अफज़ा, फल और मिठाइयों की खरीदारी जोरों पर है। दुकानदारों के चेहरों पर मुस्कान और रौनक साफ झलकती है।कपड़ों की दुकानों में भीड़ लगी हुई है बच्चे ईद के नए कपड़े, जूते और टोपी खरीदने में व्यस्त हैं। महिलाएं घर की सजावट और ईद की तैयारियों में जुटी हैं। दुकानदारों का कहना है, “रमज़ान का महीना बरकत लेकर आता है, कारोबार अपने आप बढ़ जाता है।”इफ्तार के वक़्त का नज़ारा दिल को सुकून देने वाला होता है। हर घर में दस्तरख्वान सजे हैं कहीं फलों से, कहीं पकौड़ों और दही बड़े से। अज़ान की सदा के साथ रोज़े खोलते रोज़ेदारों के चेहरों पर एक अलग ही नूर झलकता है।
रात के वक्त कांधला की गलियां जगमगा उठती हैं। लाइटों की चमक और मस्जिदों से आती तरावीह की आवाज़ माहौल को रूहानी बना देती है। बच्चे गलियों में खेलते और बड़ों की मदद करते नज़र आते हैं। मोहल्लों में भाईचारे का माहौल है हर कोई एक-दूसरे को रमज़ान की मुबारकबाद दे रहे है। इलाकों में तो ऐसा लगता है मानो रातें भी इबादत में डूबी हों। लालटेनें, रंग-बिरंगी लाइटें और खुशबूदार इत्र हर चीज़ माहौल को जन्नती बना रही है।कांधला का रमज़ान इस बार सिर्फ़ इबादत का नहीं, बल्कि भाईचारे, अमन और मोहब्बत का पैग़ाम दे रहा है।
हर मुसलमान के दिल में सुकून, हर घर में दुआ, और हर गली में रौशनी की लहर है यही है रमज़ान की असली रौनक