कांधला में सियासी तापमान चरम पर! सेवा, दिखावा और ड्रामे की बिसात सज चुकी!

 

कांधला की सियासत इन दिनों तवे पर रखी रोटी से भी ज़्यादा गरम है! नगर पालिका अध्यक्ष पद का चुनाव भले ही अभी दो साल दूर हो, लेकिन राजनीति के मैदान में हलचल चरम पर है। हर गली, नुक्कड़ और सोशल मीडिया पर बस एक ही चर्चा  “कौन मारेगा कांधला की बाज़ी?”राजनीति के खिलाड़ी मैदान में उतर चुके हैं, गोटियाँ बिछ चुकी हैं और चालें चलनी शुरू हो गई हैं। कहीं “सेवा का दिखावा”, कहीं “विकास का वादा”, तो कहीं “धार्मिक आस्था” का सहारा  हर कोई वोटों का समीकरण साधने में जुटा है।“छठ मैया नेता” की एंट्री ने सियासी खेल में नया तड़का डाल दिया है! जो कल तक किसी बड़े नेता के लिए नारे लगाते थे, आज खुद को “भावी अध्यक्ष” बताने लगे हैं। सोशल मीडिया पर “मैं भी उम्मीदवार” वाले पोस्टर ऐसे उड़ रहे हैं, जैसे चुनावी मौसम में पतंगें!हर बिरादरी में चर्चाएं तेज हैं किसी को अपनी जातीय समीकरण पर भरोसा है, तो कोई धार्मिक मंचों से वोटों की फसल बो रहा है। सूत्रों के अनुसार कई भावी प्रत्याशी जनता के बीच सेवा के नाम पर प्रचार का बीज बो चुके हैं। कोई स्कूलों में कॉपी-किताबें बाँट रहा है, तो कोई शादी-ब्याह में “विशेष मेहमान” बनकर चमक रहा है।कहीं समाजसेवा के नाम पर फ़ोटोशूट, कहीं “जनता का सेवक” वाले बैनर, तो कहीं “जनसम्पर्क यात्रा” के नाम पर सियासी पिकनिक! लोग कह रहे हैं “अब कांधला में बिना चुनाव के ही चुनाव शुरू हो गया है!”हर खेमा अपने-अपने प्यादे मैदान में उतार चुका है। कोई वोटरों को खुश करने की मीठी बातें कर रहा है, तो कोई विरोधियों की इमेज पर वार कर रहा है। कुल मिलाकर कांधला की राजनीति इस वक्त सस्पेंस, ड्रामा और दिखावे का घमासान है!वोटरों को लुभाने के लिए कोई “जनता का भाई”, कोई “सेवाभावी समाजसेवक”, तो कोई “जनता का मसीहा” बनकर गलियों में घूम रहा है।कांधला की राजनीति में इस बार खेल बड़ा है  कौन जीतेगा बाज़ी, ये वक्त ही बताएगा!

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