
कांधला से गया राहत काफ़िला, पंजाब में सरदार भाइयों ने गले लगाकर किया स्वागत
कांधला कस्बे के मोहल्ला मौलानान की गलियों से निकला राहत का काफ़िला जब पंजाब की धरती पर पहुँचा तो इंसानियत का ऐसा मंजर सामने आया जिसने सबकी आँखों को नम कर दिया और दिलों में मोहब्बत का समंदर बहा दिया।
5 सितंबर को देवरात्रि में कांधला से समाजसेवी और आम नागरिकों ने मिलकर बाढ़ पीड़ितों के लिए कपड़े, राशन, दवाइयाँ और ज़रूरी सामान इकट्ठा किया। मोहल्ले की औरतों ने अपने हाथों से खाने के पैकेट तैयार किए, बुज़ुर्गों ने दुआएँ दीं और बच्चों ने उत्साह से मदद का सामान ट्रक में लोड कराया। जब राहत ट्रक रवाना हुआ, तो पूरे कस्बे ने उसे दुआओं और नारे—“इंसानियत ज़िंदाबाद”—के साथ विदा किया।जब यह राहत सामग्री अमृतसर ज़िले के बाढ़ प्रभावित गाँव कुरमालिया और आसपास पहुँची, तो वहाँ के लोग भावुक हो उठे। सरदार भाइयों ने न केवल समाजसेवियों का खुलकर स्वागत किया, बल्कि उन्हें गले लगाकर यह संदेश दिया कि इंसानियत हर मज़हब से बड़ी है।

किसी ने अपने घर बुलाकर चाय पिलाई, तो किसी ने हाथ जोड़कर शुक्रिया अदा किया। हर चेहरे पर कृतज्ञता और मोहब्बत की चमक साफ़ झलक रही थी।“यह मदद सिर्फ़ खाने-पीने का सामान नहीं, बल्कि मोहब्बत और भाईचारे का तोहफ़ा है। जब कांधला से हमारे भाई यहाँ आए, तो ऐसा लगा जैसे परिवार के लोग मिलने आए हों।”तस्वीरों में साफ़ देखा गया कि सिख और मुस्लिम भाई कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। किसी की दाढ़ी और पगड़ी चमक रही थी, तो किसी की टोपी और दुआओं से भरा चेहरा। यह दृश्य एक ऐसी तसवीर पेश कर रहा था जो आने वाली पीढ़ियों को हमेशा यह याद दिलाएगा कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है।काफ़िले के साथ गए समाजसेवियों ने कहा—
“मुसीबत के समय इंसानियत सबसे बड़ी ताक़त है। धर्म और जाति की दीवारें वहीं गिर जाती हैं। अगर कांधला से हम यहाँ आ पाए हैं, तो यह इंसानियत की ताक़त ही है जिसने हमें एक किया।”
राहत से बढ़कर मोहब्बत
ट्रक में राशन की बोरियाँ, दवाइयाँ और कपड़े ज़रूर थे, लेकिन असली राहत वह प्यार था जो कांधला से रवाना हुआ और पंजाब में गले मिलकर पूरा हुआ। हर पैकेट मोहब्बत का पैग़ाम बन गया और हर बोरी इंसानियत की मिसाल।

इतिहास की किताब में सुनहरी इबारत
आज की यह तस्वीर सिर्फ़ एक राहत कार्य नहीं, बल्कि इतिहास का वह सुनहरा पन्ना है जो गवाही देता है कि हिंदुस्तान की मिट्टी में इंसानियत की जड़ें कितनी गहरी हैं। यह मंजर आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा यह सबक देगा कि जब इंसान मुश्किल में हो, तो इंसानियत ही उसका सबसे बड़ा सहारा होती है।