डांगरोल में निराश्रित गोवंश का रेस्क्यू! प्रशासन ने बनत गौशाला पहुंचाकर ग्रामीणों को दिलाई राहत
किसान नेता की पहल पर अमल: शामली प्रशासन ने भटकते गोवंश को गौशाला में कराया शिफ्ट
गर्मी से परेशान गोवंश और किसानों के लिए खुशखबरी, डांगरोल में प्रशासन ने चलाया रेस्क्यू अभियान
कांधला (शामली): गांव डांगरोल में निराश्रित गोवंश की बढ़ती समस्या से जूझ रहे किसानों और ग्रामीणों को प्रशासन ने बड़ी राहत दी है। शुक्रवार को जिला प्रशासन की टीम ने गांव में चलाए गए विशेष अभियान के तहत दर्जनों निराश्रित पशुओं को बनत गौशाला पहुंचाया। यह कार्रवाई किसान नेता राजन जवाला की शिकायत के बाद की गई, जिन्होंने गोवंश की वजह से हो रही परेशानी को प्रशासनिक बैठक में उठाया था।
खंड विकास क्षेत्र कांधला के गांव डांगरोल में पिछले कई महीनों से निराश्रित गोवंश की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई थी। भीषण गर्मी के चलते भूख-प्यास से बेहाल ये पशु खेतों, घरों के आसपास और सड़कों पर भटकते रहते थे, जिससे फसलों को नुकसान के साथ-साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता था। ग्रामीणों का कहना था कि इन पशुओं के नियंत्रण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे थे।
इस मुद्दे को गांव के किसान नेता राजन जवाला ने शामली के जिलाधिकारी (डीएम) के समक्ष एक बैठक में उठाया। उन्होंने गोवंश के कारण कृषि और सार्वजनिक जीवन में हो रही व्यवधानों की ओर ध्यान दिलाते हुए त्वरित कार्रवाई की मांग की। डीएम के निर्देश पर तुरंत एक रेस्क्यू टीम गठित की गई, जिसने शुक्रवार सुबह से गांव में ऑपरेशन शुरू किया।
प्रशासनिक टीम ने ग्रामीणों के सहयोग से गांव के मुख्य इलाकों और खेतों में घूम रहे निराश्रित गोवंश को एकत्रित किया। विशेष वाहनों की मदद से इन पशुओं को सावधानीपूर्वक बनत गौशाला ले जाया गया। इस दौरान पशुओं को पानी और चारा भी उपलब्ध कराया गया। गौशाला प्रबंधन ने इनके रखरखाव का भरोसा दिलाया है।
कार्रवाई के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। किसान रामसिंह ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से हमारी फसलें बर्बाद हो रही थीं। आज प्रशासन ने हमारी समस्या सुनी और समाधान निकाला। वहीं, किसान नेता राजन जवाला ने प्रशासन की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशु कल्याण दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा।
प्रशासन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि गोवंश प्रबंधन को लेकर जिले के अन्य गांवों में भी ऐसे अभियान चलाए जाएंगे। साथ ही, गौशालाओं की स्थिति सुधारने और उन्हें अधिक संसाधन उपलब्ध कराने पर भी विचार चल रहा है।
डांगरोल की यह कार्रवाई न केवल पशु कल्याण, बल्कि कृषि समुदाय और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल का उदाहरण बन गई है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी समस्याओं का समाधान त्वरित होगा।