नवजात की मौत के मामले में जांच से पहले ही लौटी स्वास्थ्य विभाग की टीम, उठे सवाल

 

शमा हॉस्पिटल में नवजात की मौत के बाद हंगामे का मामला, जांच में रजिस्ट्रेशन नंबर चस्पा न होने और नर्सरी संचालित होने की बात सामने आई

 

सादिक सिद्दीक़ी

 

कांधला। कैराना बाईपास रोड स्थित शमा हॉस्पिटल में उपचार के दौरान नवजात बच्चे की मौत के मामले में शुक्रवार देर शाम स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच के लिए अस्पताल पहुंची। टीम ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और उपलब्ध सुविधाओं समेत कई बिंदुओं की पड़ताल शुरू की। जांच के दौरान अस्पताल में रजिस्ट्रेशन नंबर चस्पा नहीं मिला, जबकि अस्पताल के अंदर बच्चों की नर्सरी संचालित मिली। हालांकि जांच पूरी होने से पहले ही टीम को एक फोन आने के बाद वापस लौटना पड़ा।जांच अधिकारी डॉ. दीपक पवार के अनुसार, अस्पताल में निरीक्षण के दौरान रजिस्ट्रेशन नंबर चस्पा हुआ नहीं मिला। इसके अलावा बच्चों की नर्सरी भी संचालित पाई गई। टीम मामले से जुड़े अन्य बिंदुओं की भी जांच कर रही थी।दरअसल, बागपत के गांव किरठल निवासी वसीम ने तबीयत बिगड़ने पर अपने नवजात बच्चे को करीब तीन दिन पहले शमा हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। परिजनों के अनुसार, बच्चे का ऑक्सीजन स्तर कम था और उसे सांस लेने में परेशानी हो रही थी। आरोप है कि बच्चे की हालत बिगड़ने के दौरान कई बार डॉक्टर को बुलाने के लिए कहा गया, लेकिन डॉक्टर मौके पर नहीं पहुंचे। परिजनों ने उचित चिकित्सकीय निगरानी और समय पर उपचार नहीं मिलने का आरोप लगाया।नवजात की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया था। परिजनों ने अस्पताल संचालक पर उपचार के नाम पर 30 हजार रुपये जमा कराने का दावा भी किया। हंगामे की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत कराया था।शुक्रवार देर शाम स्वास्थ्य विभाग की टीम के अस्पताल पहुंचने से मामले में जांच और कार्रवाई की उम्मीद जगी थी। टीम ने अस्पताल की व्यवस्थाओं की जांच शुरू की, लेकिन इसी दौरान जांच अधिकारी डॉ. दीपक पवार के अनुसार, एसीएमओ अतुल बंसल की ओर से फोन आया और टीम को वापस बुला लिया गया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच पूरी किए बिना ही अस्पताल से लौट गई।

 

*जांच अधूरी छोड़कर लौटने पर उठे सवाल*

 

नवजात की मौत जैसे गंभीर मामले में स्वास्थ्य विभाग की टीम के मौके पर पहुंचने के बाद जांच पूरी होने से पहले ही वापस लौटने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल में रजिस्ट्रेशन नंबर चस्पा न होने और बच्चों की नर्सरी संचालित होने जैसे बिंदुओं की भी जांच सामने आई है। ऐसे में सवाल है कि इन व्यवस्थाओं की वैधता और अस्पताल में नवजात के उपचार से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच कब पूरी होगी।फिलहाल नवजात की मौत को लेकर परिजनों द्वारा लगाए गए लापरवाही के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग की पूरी जांच और संबंधित अभिलेखों की पड़ताल के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अब परिजनों के साथ स्थानीय लोगों की नजर स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी है।

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