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नई दिल्ली। लंबी अवधि में निवेश के लिए इक्विटी, डेट और गोल्ड का संतुलित संयोजन निवेशकों के लिए अधिक प्रभावी साबित हो सकता है। FundsIndia Research की 25 साल की स्टडी के अनुसार, 70% इक्विटी, 15% डेट और 15% गोल्ड वाले पोर्टफोलियो ने सात साल की रोलिंग अवधि में औसतन 15% सालाना रिटर्न दिया। इस पोर्टफोलियो ने 92% अवधियों में 10% से अधिक वार्षिक रिटर्न हासिल किया।

रिसर्च में 3 जनवरी 2000 से 31 जुलाई 2026 तक की सात साल की रोलिंग अवधियों का विश्लेषण किया गया। रोलिंग रिटर्न का अर्थ है कि हर संभावित सात साल की अवधि का अलग-अलग आकलन किया गया, जिससे तेजी, मंदी और उतार-चढ़ाव वाले बाजारों में निवेश के प्रदर्शन की अधिक वास्तविक तस्वीर सामने आती है।

70:15:15 पोर्टफोलियो का प्रदर्शन

अध्ययन के मुताबिक, 70:15:15 पोर्टफोलियो का सात साल की अवधि में न्यूनतम रिटर्न लगभग 7% और अधिकतम रिटर्न करीब 28% रहा। औसत 15% रिटर्न के साथ यह छह अलग-अलग एसेट एलोकेशन रणनीतियों में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला संयोजन रहा।

50:25:25 संयोजन भी प्रभावी

रिसर्च में 50% इक्विटी, 25% डेट और 25% गोल्ड वाले पोर्टफोलियो का औसत सात साल का रिटर्न 14.2% रहा। हालांकि, इस संयोजन ने 10% से अधिक रिटर्न 81% अवधियों में दिया, जो 70:15:15 पोर्टफोलियो के 92% प्रदर्शन से कम है।

वहीं, 30% इक्विटी, 35% डेट और 35% गोल्ड वाले अपेक्षाकृत सुरक्षित पोर्टफोलियो का औसत रिटर्न 13.2% रहा और 72% अवधियों में इसका रिटर्न 10% से अधिक रहा। इससे संकेत मिलता है कि डेट और गोल्ड का हिस्सा बढ़ाने से जोखिम कम हो सकता है, लेकिन अत्यधिक रक्षात्मक रणनीति से लंबी अवधि का रिटर्न भी घट सकता है।

विविधीकरण से बढ़ी स्थिरता

अध्ययन का महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि केवल इक्विटी में निवेश करना ही लंबी अवधि में बेहतर परिणाम की गारंटी नहीं देता। इक्विटी के साथ डेट और गोल्ड को शामिल करने से पोर्टफोलियो में विविधीकरण आता है और किसी एक एसेट क्लास के खराब प्रदर्शन का असर कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

70:15:15 पोर्टफोलियो का प्रदर्शन भारतीय इक्विटी के प्रतिनिधि Nifty 50 Total Return Index के औसत सात साल के रिटर्न के बराबर, लगभग 15%, रहा। हालांकि, विभिन्न अवधियों में रिटर्न का उतार-चढ़ाव अलग-अलग रहा, इसलिए किसी भी रणनीति को जोखिम-मुक्त नहीं माना जा सकता।

पांच साल की अवधि में भी मजबूत प्रदर्शन

पांच साल की रोलिंग अवधि में 70:15:15 पोर्टफोलियो का औसत सालाना रिटर्न 15.6% रहा। इसी अवधि में 70% इक्विटी और 30% डेट वाले पोर्टफोलियो का औसत रिटर्न 14.4% बताया गया।

रिसर्च के अनुसार, 70:15:15 रणनीति ने पांच साल की 85% रोलिंग अवधियों में 10% से अधिक वार्षिक रिटर्न दिया। इससे पता चलता है कि मध्यम से लंबी अवधि के निवेशकों के लिए एसेट एलोकेशन पर ध्यान देना केवल किसी एक निवेश साधन को चुनने से अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।

सालाना रीबैलेंसिंग जरूरी

रिसर्च में पोर्टफोलियो को साल के अंत में रीबैलेंस करने की धारणा अपनाई गई, जब किसी एसेट क्लास का आवंटन तय अनुपात से लगभग पांच प्रतिशत अंक तक विचलित हो गया। उदाहरण के लिए, यदि इक्विटी का हिस्सा 70% से बढ़कर 76% हो जाए, तो कुछ इक्विटी बेचकर डेट या गोल्ड में निवेश किया जा सकता है।

हालांकि, वास्तविक निवेशकों का रिटर्न टैक्स, निवेश लागत, फंड के खर्च, बाजार में प्रवेश का समय और रीबैलेंसिंग के तरीके के कारण अलग हो सकता है। इसलिए 70:15:15 अनुपात को एक अध्ययन-आधारित उदाहरण के रूप में देखना चाहिए, न कि हर निवेशक के लिए अनिवार्य फॉर्मूले के रूप में।

निवेशकों के लिए क्या मायने

युवा और लंबी निवेश अवधि वाले निवेशक अधिक इक्विटी आवंटन पर विचार कर सकते हैं, जबकि निकट भविष्य में धन की जरूरत वाले निवेशकों को डेट का हिस्सा बढ़ाने की आवश्यकता हो सकती है। गोल्ड को पोर्टफोलियो में विविधीकरण और बाजार जोखिम से आंशिक बचाव के लिए शामिल किया जा सकता है, लेकिन निवेश का सही अनुपात व्यक्ति की उम्र, आय, लक्ष्य, जोखिम क्षमता और समयसीमा पर निर्भर करेगा।

वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, निवेश से पहले आपातकालीन निधि, बीमा और लक्ष्य-आधारित योजना को प्राथमिकता देना जरूरी है। किसी भी एसेट एलोकेशन रणनीति को अपनाने से पहले निवेशक को अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए।

 

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