हैदराबाद। हैदराबाद स्थित मल्ला रेड्डी यूनिवर्सिटी में अभिनेता यश की आगामी फिल्म ‘Toxic’ के प्री-रिलीज़ कार्यक्रम के दौरान रविवार को बड़ा हादसा हो गया। कार्यक्रम में भारी संख्या में पहुंचे छात्रों और प्रशंसकों की भीड़ के बीच साउंड सिस्टम तथा लाइटिंग के लिए लगाया गया ढांचा अचानक ढह गया। हादसे में कई छात्र उसके नीचे दब गए और घायल हो गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार्यक्रम स्थल पर अभिनेता यश को देखने और फिल्म से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोग जमा थे। भीड़ बढ़ने के साथ मंच के आसपास और तकनीकी उपकरणों वाले क्षेत्र में दबाव बढ़ गया। इसी दौरान साउंड और लाइटिंग उपकरणों का अस्थायी स्ट्रक्चर गिर पड़ा, जिससे मौके पर अफरातफरी मच गई।
घटना के बाद मौजूद लोगों ने तत्काल ढांचे के नीचे फंसे छात्रों को बाहर निकालना शुरू किया। घायलों को प्राथमिक उपचार देने के बाद नजदीकी अस्पतालों में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, घायलों की सटीक संख्या, उनकी स्वास्थ्य स्थिति और हादसे के वास्तविक कारण को लेकर आधिकारिक बयान की प्रतीक्षा है।
विश्वविद्यालय प्रशासन, आयोजनकर्ताओं और स्थानीय पुलिस की ओर से घटना की जांच किए जाने की संभावना है। जांच में यह देखा जाएगा कि आयोजन के लिए आवश्यक सुरक्षा मानकों, भीड़ नियंत्रण, आपात निकासी व्यवस्था और अस्थायी मंच व तकनीकी ढांचे की मजबूती का पर्याप्त इंतजाम था या नहीं।
यह हादसा एक बार फिर बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर कमियों की ओर संकेत करता है। भारत में क्रिकेट मैच, फिल्मी कार्यक्रम, धार्मिक आयोजन, राजनीतिक रैलियां और भर्ती परीक्षाओं जैसे आयोजनों में अत्यधिक भीड़ के कारण दुर्घटनाएं तथा भगदड़ की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे आयोजनों में प्रवेश क्षमता तय करना, अलग-अलग प्रवेश और निकास मार्ग बनाना, बैरिकेडिंग, प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, पुलिस समन्वय, मेडिकल टीम और आपातकालीन निकासी योजना अनिवार्य होनी चाहिए। खासकर शैक्षणिक परिसरों में होने वाले सेलिब्रिटी कार्यक्रमों में छात्रों की सुरक्षा को प्रचार या मनोरंजन से ऊपर रखा जाना जरूरी है।
घटना ने युवा दर्शकों के बीच स्टार-केंद्रित आयोजनों की बढ़ती भीड़ और उनके सामाजिक संदर्भ पर भी बहस छेड़ दी है। बेरोजगारी, सीमित मनोरंजन विकल्पों और सेलिब्रिटी संस्कृति के बीच युवाओं का बड़ी संख्या में ऐसे कार्यक्रमों की ओर आकर्षित होना स्वाभाविक है, लेकिन इसकी कीमत उनकी सुरक्षा नहीं होनी चाहिए। जिम्मेदारी आयोजकों, संस्थानों और प्रशासन की है कि वे उत्साह को असुरक्षित भीड़ में न बदलने दें।
फिलहाल, सभी की नजरें घायलों के स्वास्थ्य, प्रशासन की कार्रवाई और दुर्घटना की आधिकारिक जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।
