कांधला बस स्टैंड पर अतिक्रमण के खिलाफ भाकियू का हल्लाबोल, प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग

 

फुटपाथ कब्जामुक्त कराने को भाकियू की आवाज बुलंद, ब्रह्मपाल नाला ने उठाया मुद्दा

 

 

कांधला। कस्बे के दिल्ली बस स्टैंड पर बढ़ता अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग अब लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। फुटपाथ पर रेहड़ी-ठेलियों का कब्जा, सड़क किनारे बेतरतीब खड़े ई-रिक्शा और दुकानदारों द्वारा सड़क तक सामान फैलाए जाने से यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है। शाम होते ही बस स्टैंड पर हालात और भी खराब हो जाते हैं। वाहनों की भीड़ के बीच राहगीरों को निकलने तक के लिए जगह तलाशनी पड़ती है।

 

 

*शाम होते ही बस स्टैंड में ‘जाम का जंजाल’*

शाम के समय बस स्टैंड और आसपास के बाजार में भीड़ बढ़ते ही सड़क पर वाहनों का दबाव बढ़ जाता है। एक ओर बसों का आवागमन, दूसरी ओर बाइक और कारों की भीड़ तथा बीच सड़क पर खड़े ई-रिक्शा यातायात को उलझा देते हैं। हालात यह हो जाते हैं कि बाइक और कार निकालना तो दूर, कई बार पैदल राहगीरों के लिए भी सड़क पार करना मुश्किल हो जाता है।

 

*फुटपाथ राहगीरों के लिए या ठेलियों के लिए?*

बस स्टैंड का फुटपाथ राहगीरों के सुरक्षित आवागमन के लिए है, लेकिन यहां जगह-जगह रेहड़ी-ठेलियां लगी नजर आती हैं। फल और अन्य सामान बेचने वाले फुटपाथ पर अपनी दुकानें सजाकर बैठ जाते हैं। इसके चलते पैदल यात्रियों को मजबूरी में मुख्य सड़क पर उतरना पड़ता है। सड़क पर पहले से मौजूद वाहनों के बीच पैदल चलने से दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।

 

*ई-रिक्शा की बेतरतीब पार्किंग ने बढ़ाई मुसीबत*

बस स्टैंड के आसपास ई-रिक्शा भी निर्धारित स्थान के बजाय मनमाने तरीके से खड़े किए जाते हैं। यात्रियों को बैठाने और उतारने के दौरान सड़क पर ई-रिक्शा रुकने से यातायात की रफ्तार थम जाती है। कई वाहन एक साथ खड़े हो जाने पर सड़क का बड़ा हिस्सा घिर जाता है और जाम की स्थिति पैदा हो जाती है।

*सड़क किनारे ट्रकों का डेरा, रास्ता हुआ और संकरा*

समस्या यहीं खत्म नहीं होती। शाम के समय सड़क किनारे भारी संख्या में ट्रक और अन्य बड़े वाहन खड़े होने से सड़क और संकरी हो जाती है। अतिक्रमण, ई-रिक्शा और भारी वाहनों की पार्किंग एक साथ होने से बस स्टैंड पर यातायात व्यवस्था चरमरा जाती है। ऐसे में किसी आपात स्थिति में एंबुलेंस या अन्य जरूरी वाहन के निकलने में भी परेशानी पैदा हो सकती है।

 

*‘कहीं हादसे के बाद न जागे प्रशासन’*

स्थानीय लोगों का कहना है कि बस स्टैंड पर रोजाना बढ़ती अव्यवस्था को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। भीड़भाड़ वाले स्थान पर राहगीरों का सड़क पर चलना और वाहनों का बेतरतीब तरीके से खड़ा होना कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि केवल औपचारिक कार्रवाई के बजाय मौके पर स्थायी व्यवस्था कराई जाए।

 

*भाकियू ने पुलिस-प्रशासन से की तत्काल कार्रवाई की मांग*

भारतीय किसान यूनियन के मंडल उपाध्यक्ष ब्रह्मपाल नाला ने पुलिस-प्रशासन से बस स्टैंड की समस्या पर तत्काल ध्यान देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि फुटपाथ को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए और राहगीरों के लिए रास्ता खाली कराया जाए। साथ ही ई-रिक्शा के लिए व्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था और सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों के लिए भी उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि खासकर शाम के समय बस स्टैंड पर यातायात व्यवस्था को मजबूत किया जाना बेहद जरूरी है। यदि समय रहते अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग पर प्रभावी कार्रवाई की गई तो यात्रियों और राहगीरों को राहत मिलने के साथ संभावित अनहोनी को भी टाला जा सकता है। भाकियू ने प्रशासन से इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए जल्द कार्रवाई की मांग की है।

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