नरेश सैनी को श्रद्धांजलि देने पहुंचे सुरेश राणा, बोले जनसेवा की मिसाल थे हमारे साथी

 

* भाजपा के कर्मठ सिपाही को श्रद्धांजलि: सुरेश राणा ने नरेश सैनी के परिवार से मिलकर बंधाया ढांढस, बोले”जनसेवा की मिसाल थे नरेश”सैनी

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कांधला। कस्बे में सोमवार को भावुक माहौल देखने को मिला, जब उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता सुरेश राणा दिवंगत भाजपा नेता नरेश सैनी के आवास पर पहुंचे और शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने दिवंगत नेता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी तथा परिवार को इस कठिन समय में धैर्य और साहस बनाए रखने का संबल दिया।

गौरतलब है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता नरेश सैनी का 16 जून को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई थी। राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय रहने वाले नरेश सैनी ने वर्षों तक भाजपा संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ जनहित के मुद्दों पर लगातार संघर्ष किया और लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई।

शोक व्यक्त करते हुए सुरेश राणा ने कहा कि “नरेश सैनी केवल भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि परिवार के अभिन्न सदस्य थे। उन्होंने अपने जीवन का हर पल संगठन, समाज और जनता की सेवा के लिए समर्पित किया। उनका जाना भाजपा परिवार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र के लिए ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।”

उन्होंने कहा कि नरेश सैनी की सादगी, कर्मठता और जनसेवा का जज्बा हमेशा कार्यकर्ताओं को प्रेरित करता रहेगा। संगठन उनके योगदान को कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने शोकाकुल परिवार को भरोसा दिलाया कि दुख की इस घड़ी में भाजपा का पूरा संगठन उनके साथ मजबूती से खड़ा है।

श्रद्धांजलि सभा के दौरान बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता और क्षेत्र के गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की और परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

इस अवसर पर तरुण अग्रवाल, पवन कंसल, गौरव चौधरी, संजीव आडवाणी, वरुण चौधरी, विक्रम सैनी, प्रदीप सैनी, बबलू सैनी, हर्ष सैनी, सुधा तोमर सहित अनेक भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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*जनसेवा की अमिट छाप छोड़ गए नरेश सैनी*

क्षेत्रवासियों का कहना है कि नरेश सैनी हमेशा समाज के हर वर्ग की समस्याओं को अपनी समस्या मानकर उनके समाधान के लिए आगे रहते थे। उनका सरल स्वभाव, मिलनसार व्यक्तित्व और संगठन के प्रति निष्ठा उन्हें लोगों के दिलों में हमेशा जीवित रखेगी। उनके निधन से कांधला की राजनीति और सामाजिक जीवन में एक ऐसा खालीपन पैदा हुआ है, जिसे लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।

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