
दहशत फैलाने वाले जानवर अब इलाज से हो रहे शांत, लोगों में खुशी
* ‘कुत्ता-बंदर आतंक’! बेजुबानों के डॉक्टर बनकर मैदान में उतरी टीम, लोगों ने ली राहत की सांस
कांधला। कभी गलियों में आवारा और आक्रामक कुत्तों के डर से बच्चे घरों से निकलने में हिचकिचाते थे, तो बंदरों के झुंड लोगों के हाथों से सामान छीनकर दहशत फैलाते थे। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। समाजसेवा का जज्बा रखने वाली एक टीम ने इन बेजुबानों का निःशुल्क इलाज शुरू कर पूरे कस्बे में राहत की नई उम्मीद जगा दी है।कस्बे के लोगों का कहना है कि पहले आए दिन पागल कुत्तों के हमले और बंदरों के उत्पात की घटनाएं सामने आती थीं। कई लोग घायल हुए और मोहल्लों में भय का माहौल बना रहता था। अब संस्था की सक्रियता से ऐसे मामलों में लगातार कमी आ रही है और लोग खुद को पहले से ज्यादा सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
कस्बा निवासी दिनेश ने बताया कि संस्था की टीम बीमार और आक्रामक जानवरों का नियमित इलाज कर रही है, जिससे उनके व्यवहार में सुधार आया है। इस पहल ने पूरे कस्बे को बड़ी राहत दी है।इस नेक मिशन की कमान राजू सैनी, मुकुल सैनी और मोहम्मद सोनू संभाल रहे हैं। संचालक राजू सैनी ने बताया कि उनकी टीम बिना किसी शुल्क के घायल, बीमार और पागलपन के लक्षण वाले कुत्तों व बंदरों का इलाज करती है। सड़क हादसों में घायल जानवरों को मौके पर प्राथमिक उपचार, दवाइयां और आगे की देखभाल भी उपलब्ध कराई जाती है।अब लोग इस टीम को “बेजुबानों का फरिश्ता” कहकर पुकार रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि ऐसे प्रयास लगातार जारी रहे तो न सिर्फ जानवरों को नई जिंदगी मिलेगी, बल्कि कस्बे की गलियां भी डर नहीं, बल्कि सुरक्षित माहौल की पहचान बनेंगी।