
करबला की याद में नम हुईं आंखें, शुरू हुआ मजलिसों का सिलसिला
* गंगेरू इमामबाड़े में शुरू हुईं मजलिसें, करबला के पैगाम से गूंजा क्षेत्र
सादिक सिद्दीक़ी
कांधला। थाना क्षेत्र के गांव गंगेरू स्थित इमामबाड़े में मोहर्रम की मजलिसों का आगाज़ हो गया है। हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके वफादार साथियों की शहादत की याद में आयोजित मजलिसों में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल होकर उन्हें खिराज-ए-अकीदत पेश कर रहे हैं। मजलिसों के शुरू होते ही पूरे क्षेत्र में गम, श्रद्धा और धार्मिक आस्था का माहौल बन गया है।
मजलिसों में उलेमा और जाकिरों ने करबला के दर्दनाक वाकये को बयान करते हुए हज़रत इमाम हुसैन की कुर्बानी, सब्र और इंसाफ के लिए उनके संघर्ष पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि करबला केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि अत्याचार के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने और सत्य के मार्ग पर चलने का अमर संदेश है।
मजलिस के दौरान सोजख्वानी और नौहाख्वानी का सिलसिला भी जारी रहा। इमाम हुसैन की शहादत का जिक्र सुनकर अकीदतमंद गम में डूब गए और कई लोगों की आंखें नम हो गईं। मजलिस में मौजूद लोगों ने करबला के शहीदों को याद करते हुए उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
आयोजकों के अनुसार चांद रात से शुरू हुआ यह सिलसिला लगातार 12 दिनों तक जारी रहेगा। इसके बाद विभिन्न स्थानों पर पारंपरिक जुलूस और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
सैयद अब्बास ने बताया कि मजलिसों में शिया और सुन्नी समुदाय के साथ-साथ अन्य धर्मों के लोग भी बड़ी संख्या में शामिल होते हैं, जो आपसी भाईचारे, प्रेम और सौहार्द की मिसाल पेश करते हैं।
इस अवसर पर सैयद अब्बास, सैयद आबिद, सैयद शाहिद अली अब्बास समेत क्षेत्र के सम्मानित लोग, समाजसेवी और बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे। कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।