सड़क बनी तालाब, प्रशासन बेखबर मुस्तफाबाद में जलभराव से फूटा गुस्सा

 

 

सादिक सिद्दीक़ी .

 

 

कांधला कस्बे के देहात के मोहल्ला मुस्तफाबाद में इन दिनों हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। सड़कें पूरी तरह पानी में डूबी हैं और लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। हालात ऐसे हैं कि सड़क और तालाब में फर्क करना भी मुश्किल हो रहा है। गंदे पानी से भरी गलियों ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर ब्रेक लगा दिया है।स्थानीय लोगों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। दर्जनों ग्रामीणों ने पानी से लबालब भरी सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया और ग्राम प्रधान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों का साफ कहना है अब सिर्फ आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए और वो भी तुरंत!

*आवागमन ठप, बच्चों और बुजुर्गों की हालत सबसे खराब*

बस्ती निवासी अब्दुल गफ्फार के मुताबिक, जलभराव के कारण पूरा रास्ता बंद जैसा हो गया है। खासकर बुजुर्गों और छोटे बच्चों को निकलने में भारी दिक्कत हो रही है। स्कूल जाने वाले बच्चों को रोज कीचड़ और गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।

*“हर बार मिला सिर्फ आश्वासन”*

नोशाद खान का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार ग्राम प्रधान से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन हर बार सिर्फ मीठी बातें और आश्वासन ही मिला। नतीजा ये कि हालात जस के तस बने हुए हैं और लोगों की परेशानी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।

*नमाजियों तक को मुश्किल, हालात हुए गंभीर*

मोहम्मद वसीम ने बताया कि यह समस्या सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि नमाज पढ़ने जाने वाले बुजुर्गों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गंदे पानी से होकर गुजरना मजबूरी बन चुका है।

*अब खुद ही निकालते हैं पानी”*

ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही। जब हालात ज्यादा बिगड़ जाते हैं तो लोग खुद ही पानी निकालने की कोशिश करते हैं, ताकि किसी तरह राहत मिल सके।

*प्रधान का पक्ष“प्रस्ताव पास नहीं, इसलिए काम अटका”*

वहीं ग्राम प्रधान चमन सिद्दीकी का कहना है कि सड़क के नवीनीकरण के लिए कई बार प्रयास किए गए हैं, लेकिन प्रस्ताव पास न होने की वजह से काम शुरू नहीं हो पाया।

*सवाल बड़ा है आखिर कब तक यूं ही डूबेगा मुस्तफाबाद?*

लोगों का गुस्सा अब साफ संकेत दे रहा है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है। अब देखने वाली बात होगी कि जिम्मेदार कब जागते हैं और मुस्तफाबाद को इस जलभराव की मुसीबत से कब राहत मिलती है।

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