
कांधला में इमान बरकरार, पर जेबें लाचार महंगाई ने तोड़ी इफ्तार की मिठास!
रमज़ान की रौनक पर महंगाई का झटका!इफ्तार की खुशबू में महंगाई की मिलावट रोज़ेदारों की थाली से उड़ गई मिठास
सादिक सिद्दीक़ी
कांधला रमज़ान का महीना शुरू होते ही कांधला की गलियों में रौनक लौट आई है। मस्जिदों में अज़ान की सदा, बाजारों में रौशनियाँ और घरों में इफ्तार की तैयारियाँ हर ओर एक अलग ही माहौल है। लेकिन इन खुशियों के बीच महंगाई की चुभन ने सबका स्वाद बिगाड़ दिया है।जहां एक ओर लोग रहमतों और बरकतों में डूबे हैं, वहीं दूसरी ओर खजूर से लेकर दूध, शरबत, फल और पकोड़ी तक सबकी कीमतें बढ़ जाने से आम आदमी का रोज़ा महंगा पड़ रहा है। बाजारों में भीड़ तो है, लेकिन हर कोई शिकायत करता नज़र आता है “रमज़ान आया तो खुशियाँ लाया, पर महंगाई ने सब मिटा दिया!”शाम ढलते ही दिल्ली रोड, मयूर तिराहा और मुख्य बाजारों में भीड़ का सैलाब उमड़ पड़ता है। हर कोई अपनी थाली को सजाने के लिए जुटा है, मगर जेबें जवाब दे रही हैं। दुकानदारों के चेहरे पर मुस्कान है, पर ग्राहकों के माथे पर शिकन यही हालात हैं कांधला के बाजारों के। बाजारों में नज़ारा देखिए रंग-बिरंगे फलों से सजी दुकानें, शरबत की महक और तले पकवानों की खुशबू हर ओर फैली है। लेकिन महंगाई की “गरमी” ने लोगों की खरीदारी ठंडी कर दी है। महिलाएं झोले में कम सामान लेकर लौट रही हैं, तो बच्चे मिठाइयों की ओर लालच भरी नज़रें डालते दिखाई देते हैं।
स्थानीय लोगों की जुबानी:
“रमज़ान तो रहमतों का महीना है, पर इस बार जेबें खाली हो गईं,” एक बुज़ुर्ग रोज़ेदार ने मुस्कुराते हुए कहा।“रोज़े की भूख से नहीं, दामों की मार से ज़्यादा पसीना निकल रहा है,” एक दुकानदार ने मज़ाकिया लहजे में जोड़ा।फिर भी, कांधला का जज़्बा कायम है। चाहे महंगाई आसमान छू रही हो, लेकिन इमान और इबादत की रौशनी अब भी हर दिल में चमक रही है।