बेटियों के निकाह की खुशियां बांटने निकले दो भाई, भसाना में मौत ने रोक दिया सफर

 

05 अक्टूबर को साजिद की दो बेटियों का होना था निकाह, कार्ड बनवाने और रिश्तेदारों को न्योता देने निकले थे दोनों चचेरे भाई

 

सादिक सिद्दीक़ी

कांधला। गांव भसाना के निकट हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने दो परिवारों की खुशियां पलभर में मातम में बदल दीं। हादसे में कांधला के मोहल्ला खेल निवासी दो चचेरे भाइयों की रोडवेज बस की टक्कर से मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में साजिद और उसका चचेरा भाई इदरीश शामिल हैं। हादसे की सबसे दर्दनाक बात यह रही कि साजिद अपनी दो बेटियों के निकाह की तैयारियों में जुटा था और आगामी 05 अक्टूबर को दोनों बेटियों की शादी होनी थी। बेटियों के निकाह की खुशियां रिश्तेदारों और परिचितों तक पहुंचाने के लिए वह अपने चचेरे भाई इदरीश के साथ घर से निकला था, लेकिन किसी को क्या पता था कि खुशियां बांटने निकला यह सफर दोनों भाइयों का आखिरी सफर बन जाएगा।जानकारी के अनुसार मोहल्ला खेल निवासी साजिद चार बेटियों का पिता था और ईंट-भट्ठे पर मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। सीमित आमदनी के बावजूद साजिद अपनी बेटियों की शादी की जिम्मेदारी पूरी करने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहा था। घर में शादी की तैयारियां जोरों पर थीं। रिश्तेदारों को निमंत्रण देने, शादी के कार्ड बनवाने और अन्य जरूरी सामान की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी साजिद संभाल रहा था।इसी सिलसिले में बुधवार को साजिद अपने चचेरे भाई इदरीश के साथ बाइक पर सवार होकर जनपद मुजफ्फरनगर क्षेत्र की ओर निकला था। दोनों परिवारों में शादी को लेकर उत्साह का माहौल था। घर में बेटियों के निकाह की तैयारियां चल रही थीं और रिश्तेदारों के आने-जाने का सिलसिला शुरू हो चुका था। लेकिन गांव भसाना के निकट तेज रफ्तार रोडवेज बस ने पीछे से बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों चचेरे भाइयों की मौके पर ही मौत हो गई।

 

जिस घर में गूंजने वाली थीं शहनाइयां, वहां मच गई चीख-पुकार

 

हादसे की सूचना जैसे ही दोनों परिवारों तक पहुंची, शादी की खुशियों के बीच चीख-पुकार मच गई। जिन घरों में बेटियों के निकाह की तैयारियां चल रही थीं, वहां अचानक मातम छा गया। कुछ देर पहले तक जिन घरों में शादी के गीत, मेहमानों के स्वागत और निकाह की तैयारियों की चर्चा हो रही थी, उन्हीं घरों में अपनों को खोने का गम पसरा हुआ है।साजिद की दो बेटियों का आगामी 05 अक्टूबर को निकाह होना था। परिवार बेटी की शादी को यादगार बनाने की तैयारियों में जुटा था, लेकिन हादसे ने परिवार के सारे अरमानों पर पानी फेर दिया। एक ओर बेटियों की डोली उठने की तैयारी थी तो दूसरी ओर पिता की अर्थी उठने की खबर ने पूरे परिवार को झकझोर दिया।हादसे में जान गंवाने वाला इदरीश भी मेहनत-मजदूरी कर परिवार का सहारा बना हुआ था। उसके पांच बेटे और पांच बेटियां हैं। सभी बच्चों की शादी हो चुकी थी, लेकिन परिवार की जिम्मेदारियां खत्म नहीं हुई थीं। बच्चों की शादियां करने के बाद भी इदरीश लगातार ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करता रहा और अपनी मेहनत की कमाई से परिवार का खर्च चलाता था।दोनों चचेरे भाई मेहनतकश परिवारों से ताल्लुक रखते थे। दोनों अपने परिवार के लिए दिन-रात मेहनत करते थे। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि एक सामान्य सा दिन उनके जीवन का आखिरी दिन बन जाएगा।

 

बेटियों की शादी से पहले पिता की मौत ने परिवार को तोड़कर रख दिया

 

साजिद की बेटियों के निकाह की तैयारियां अंतिम दौर में थीं। घर में शादी के कार्ड बांटने और रिश्तेदारों को निमंत्रण देने का सिलसिला चल रहा था। इसी बीच हुए हादसे ने परिवार को ऐसा गहरा जख्म दिया है, जिसे भरना आसान नहीं होगा।बेटियों के हाथ पीले करने का सपना संजोए पिता खुद दुनिया से चला गया। जिन हाथों से वह बेटियों की शादी की तैयारियां कर रहा था, वही हाथ अब हमेशा के लिए शांत हो गए। हादसे ने न केवल दो परिवारों के कमाऊ सदस्यों को छीन लिया, बल्कि शादी की खुशियों को भी गहरे मातम में बदल दिया।हादसे के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे क्षेत्र में घटना को लेकर शोक की लहर है। हर किसी की जुबान पर यही बात है कि जिस सफर पर दोनों भाई बेटियों के निकाह की खुशियां बांटने निकले थे, उन्हें क्या पता था कि सड़क पर मौत उनका इंतजार कर रही है।

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