कैराना = मोहर्रम की दसवीं (यौमे आशूरा) के अवसर पर नवाब रज़ा अली खां के अज़ाखाने से ताज़िया व हज़रत अब्बास के अलम का भव्य जुलूस निकाला गया। जुलूस मुख्य बाजार होते हुए पानीपत-खटीमा राजमार्ग से गुज़रकर डिग्री कॉलेज के सामने स्थित कर्बला पहुँचा, जहाँ धार्मिक रस्मों के साथ इसका शांतिपूर्ण समापन हुआ।
जुलूस में मौजूद अज़ादारों ने नौहाख्वानी, मातम और सीना-ज़नी कर इमाम हुसैन और करबला के शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। युवाओं और बच्चों ने बड़े-बड़े अलम उठाए थे, जिन पर “या हुसैन”, “या अली” और “या अब्बास” के सन्देश लिखे थे। पूरा माहौल इमाम हुसैन की शहादत की याद और उलझन-ए-दर्द से परिपूर्ण था।

कर्बला स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधार्थ कई स्थानों पर ठंडे पानी की सबीलें लगाई गईं और तबर्रुक का वितरण किया गया। मौलाना इमरान काज़मी ने यौमे आशूरा की महत्ता बताते हुए कहा कि यह दिन इमाम हुसैन व उनके साथियों की उस महान कुर्बानी की याद दिलाता है, जो उन्होंने धर्म, इंसाफ और इंसानियत की रक्षा के लिये दी थी। उन्होंने कहा कि कर्बला का संदेश सब्र, कुर्बानी और अन्याय के ख़िलाफ़ डट कर खड़े होने की शिक्षा देता है तथा अहलेबैत की सीखों पर चलकर समाज में प्रेम व भाईचारे को बढ़ाया जा सकता है।
सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक समयपाल अत्री के नेतृत्व में पुलिस बल पूरी तरह तैनात रहा, जिसके कारण जुलूस शांति के साथ संपन्न हुआ।
जुलूस में अलहाज कौसर ज़ैदी, अली हैदर ज़ैदी, वसी हैदर साकी, गुलज़ार अली, शान हैदर शानू, कुर्रतुल ऐन मेहदी, अली मेहदी, सैयद शहाबुद्दीन हुसैन, फ़राज़ अली, सरवर हुसैन, दानिश रज़ा, फ़ैसल रज़ा, अख्तर हुसैन, डॉ. फ़रहत, अख्तर अब्बास, शहज़ाद रज़ा, आसिफ अली, रज़ी हैदर, अली अहमद, अली गौहर, अली मियां, काज़िम हुसैन, शाहिद हुसैन, ज़ामिन अली, हाजी शाहिद हुसैन, हाजी जाफर अब्बास, शबाब हैदर, मोहम्मद अली, मुमताज़ अली, मोहम्मद आलम, अरबाब हैदर और शाह रज़ा ज़ैदी सोनू सहित सैकड़ों अज़ादार व अहलेबैत के चाहने वाले उपस्थित रहे।