
जर्जर सरकारी क्वार्टर बने हादसे का खतरा, कब्जे के आरोपों से मचा हड़कंप
सादिक सिद्दीक़ी
कांधला। कस्बे के मोहल्ला खेल स्थित सरकारी अस्पताल परिसर के सरकारी क्वार्टर लंबे समय से बदहाली और उपेक्षा का दंश झेल रहे हैं। देखरेख और मरम्मत के अभाव में अस्पताल कर्मचारियों के लिए बनाए गए कई सरकारी आवास अब पूरी तरह जर्जर होकर खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। भवनों की हालत ऐसी है कि कभी भी कोई बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से इन सरकारी क्वार्टरों की ओर जिम्मेदार अधिकारियों ने गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। दीवारों और छतों की हालत खराब है, कई हिस्सों में भवन टूट-फूट का शिकार हैं और आसपास झाड़ियां व गंदगी भी जमा है। जर्जर भवनों के कारण सरकारी संपत्ति की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
खाली पड़े क्वार्टरों पर कब्जे का आरोप
स्थानीय लोगों ने जर्जर पड़े सरकारी क्वार्टरों पर अज्ञात लोगों द्वारा कब्जा किए जाने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि लंबे समय से खाली पड़े आवासों में कुछ लोगों ने कथित तौर पर कब्जा कर वहां रहना शुरू कर दिया है। यदि सरकारी संपत्ति पर वास्तव में अवैध कब्जा है तो यह गंभीर मामला है और इसकी जांच कराकर स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।
कस्बे के निवासी नसीम ने बताया कि ये क्वार्टर सरकारी अस्पताल में तैनात कर्मचारियों के रहने के लिए बनाए गए थे। उनके अनुसार अधिकारियों की लापरवाही और लंबे समय से रखरखाव नहीं होने के कारण इनकी हालत लगातार खराब होती चली गई। नसीम ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ जर्जर क्वार्टरों पर लोगों ने कब्जा कर रखा है।
हादसा हुआ तो कौन होगा जिम्मेदार?
जर्जर सरकारी भवनों को लेकर सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा का है। यदि इन भवनों का कोई हिस्सा अचानक गिरता है और इसकी चपेट में कोई व्यक्ति आता है तो जिम्मेदारी किसकी होगी, यह सवाल स्थानीय लोगों को परेशान कर रहा है। अस्पताल परिसर में आने-जाने वाले मरीजों, तीमारदारों और आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा को देखते हुए जर्जर भवनों की तत्काल जांच जरूरी बताई जा रही है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इन सरकारी क्वार्टरों का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए। भवनों की वास्तविक स्थिति की जांच कराकर जो आवास रहने योग्य नहीं हैं, उनके संबंध में नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही यदि किसी सरकारी क्वार्टर पर अवैध कब्जा पाया जाता है तो उसे कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई भी की जाए।
चिकित्सा प्रभारी ने दिया कार्रवाई का भरोसा
मामले को लेकर चिकित्सा प्रभारी डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकारी क्वार्टरों पर कब्जा करने वाले लोगों को चिन्हित कर उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह है कि जांच के बाद जर्जर सरकारी क्वार्टरों की स्थिति सुधरती है या फिर ये भवन इसी तरह सरकारी उपेक्षा की कहानी बयां करते रहेंगे।