
भाई के प्रेम में भावुक हुए दर्शक! श्रीराम की खड़ाऊं सिर पर रख अयोध्या लौटे भरत
* श्री पंजाबी धर्मशाला की रामलीला में ‘भरत मिलाप’ का भावपूर्ण मंचन, भाई के प्रति त्याग और समर्पण ने जीता दर्शकों का दिल
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सादिक सिद्दीक़ी
कांधला कस्बे के मोहल्ला शेखजादगान स्थित श्री पंजाबी धर्मशाला सनातन धर्म मंदिर में चल रही रामलीला में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण की आरती के उपरांत ‘भरत मिलाप प्रसंग’ का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने शानदार अभिनय से ऐसा समां बांधा कि भगवान श्रीराम और भरत के अटूट प्रेम का दृश्य देखकर दर्शक भाव-विभोर हो गए। भरत का त्याग, श्रीराम की मर्यादा और दोनों भाइयों के बीच प्रेम व समर्पण की भावना रामलीला का मुख्य आकर्षण रही।
रामलीला में दिखाया गया कि भगवान श्रीराम के वनवास जाने के वियोग में राजा दशरथ अपने प्राण त्याग देते हैं। पिता की मृत्यु और श्रीराम को वनवास भेजे जाने की जानकारी मिलने पर भरत गहरे शोक में डूब जाते हैं। अयोध्या पहुंचने पर जब उन्हें पूरे घटनाक्रम का पता चलता है, तो वह अपनी माता कैकेयी के निर्णय का कड़ा विरोध करते हैं। भरत स्पष्ट कर देते हैं कि उन्हें ऐसा राजसिंहासन स्वीकार नहीं है, जिसके लिए उनके बड़े भाई श्रीराम को वनवास जाना पड़ा।
इसके बाद भरत गुरु वशिष्ठ की आज्ञा लेकर भगवान श्रीराम को अयोध्या वापस लाने के लिए चित्रकूट पहुंचते हैं। वहां अपने बड़े भाई श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण से मिलकर भरत उन्हें अयोध्या लौटने के लिए मनाने का प्रयास करते हैं। भाइयों के मिलन का यह दृश्य देखकर रामलीला देखने पहुंचे दर्शक भावुक हो उठते हैं।
भरत बार-बार श्रीराम से अयोध्या लौटकर राजसिंहासन संभालने की विनती करते हैं, लेकिन भगवान श्रीराम पिता राजा दशरथ को दिए गए वचन और 14 वर्ष के वनवास को पूरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं। श्रीराम के निर्णय के सामने भरत उनकी मर्यादा का सम्मान करते हुए उनकी खड़ाऊं मांगते हैं।
जब भगवान श्रीराम ने भरत को अपनी खड़ाऊं सौंपी, तो भाई के प्रति प्रेम, त्याग और समर्पण का अनूठा संदेश देखने को मिला। भरत खड़ाऊं को सिर पर रखकर अयोध्या लौटने का निर्णय लेते हैं और संकल्प लेते हैं कि श्रीराम की वापसी तक राजसिंहासन पर उनकी खड़ाऊं रखकर ही शासन व्यवस्था संचालित करेंगे।रामलीला के इस मार्मिक प्रसंग ने दर्शकों को पारिवारिक एकता, बड़ों के सम्मान, वचन पालन और निस्वार्थ प्रेम का संदेश दिया। कलाकारों के सजीव अभिनय ने पूरे प्रसंग को भावपूर्ण बना दिया।